सही समय पर जन्मजात विकृति की पहचान से नवजात को मिल सकता है नया जीवन

सही समय पर जन्मजात विकृति की पहचान से नवजात को मिल सकता है नया जीवन
- गृह भ्रमण व टीकाकरण के दौरान आशा कार्यकर्ता व एएनएम शिशुओं में जन्मजात विकृति की करती हैं पहचान - शिशुओं में विकृति पाए जाने पर सदर अस्पताल में स्थित एसएनसीयू में होता है उनका इलाज बक्सर | जिले को स्वस्थ व बीमारियों को दूर रखने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं। जिसका मुख्य उद्देश्य सही समय पर बीमारियों की पहचान कर उनका इलाज करना है। विशेषकर नवजात और शिशुओं के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि, यही वो पल होता है, जिसपर उनका भविष्य और सर्वांगीण विकास निर्भर होता है। इसलिये नवजात शिशुओं का जन्म होने से ही उनकी मॉनिटरिंग की जाती है। ऐसा करना आवश्यक होता है क्योंकि नवजात को जन्म के ही समय कुछ विकृतियां हो सकती हैं । सही समय पर विकृतियों की पहचान कर नवजात को नया जीवन दान भी दिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए वार्ड व पंचायत स्तर पर आशा कार्यकर्ता द्वारा गृह भ्रमण तो किया ही जाता है, साथ ही साथ शिशुओं के संपूर्ण टीकाकरण के अवसर पर भी एएनएम व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा इसकी जांच की जाती है। ताकि, शिशुओं व नवजातों में जन्मजात विकृतियों की पहचान की जा सके। एसएनसीयू में उपलब्ध है सुविधा : अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल भट्ट ने बताया जन्मजात विकृतियों की सही समय पर पहचान करना जरूरी होता है। नवजात को समुचित इलाज प्रदान कर उनकी विकृति को दूर किया जा सकता है। समुदाय स्तर पर आशा घर-घर जाकर जन्मजात विकृति वाले नवजातों की पहचान करती है। इसके लिए आशाओं का क्षमतावर्धन भी किया गया है। फैसिलिटी स्तर पर भी संस्थागत प्रसव के बाद नवजातों में जन्मजात विकृति की पहचान की जाती है। चिह्नित नवजातों को विशेष इलाज प्रदान कराने के लिए जिले में स्थित सिक न्यू बोर्न यूनिट (एसएनसीयू) में रेफर किया जाता है। एसएनसीयू में ऐसे बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है। इन विकृतियों की होती है पहचान : जन्मजात विकृतियों में कई जटिलताएं शामिल होती हैं । स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा विभिन्न विकृतियों की पहचान की जाती है। जिसमें मल त्याग करने के रास्ते का नहीं बनना, श्वास नली में अधिक समस्या, पैरों का मुड़ा होना, सर का आकर सामान्य से अधिक हो जाना, हृदय में छिद्र या हृदय संबंधित गंभीर समस्या का होना एवं स्पाइनल कोर्ड विकृति जैसे अन्य रोग भी शामिल हैं । गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज रेफ़र करने का प्रावधान : समुदाय एवं फैसिलिटी स्तर से जन्मजात विकृति वाले बच्चों को चिह्नित कर सर्वप्रथम एसएनसीयू भेजा जाता है। एसएनसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में इलाज होता है। लेकिन यदि स्थिति अधिक नाजुक होती है तब एसएनसीयू से नवजात को नजदीकी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रेफर करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके लिए जिले के एसएनसीयू को राज्य की तरफ़ से निर्देशित भी किया गया है। गर्भवती महिलाएं इन बातों पर दें ध्यान : - गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान हरी पत्तेदार सब्जियां, फ़ल, दाल एवं फ़ोलिक एसिड युक्त आहार का अधिक सेवन करना चाहिए - गर्भावस्था के दौरान कम से कम 3 प्रसव पूर्व जांच जरूर करायें - चिकित्सक की सलाह पर ही किसी भी प्रकार का दवा सेवन करें - गर्भावस्था के दौरान शराब सेवन या ध्रूमपान सेवन से बचें - गर्भावस्था के दौरान साफ़-सफाई पर ध्यान दें - किसी भी यौन संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में सलाह लें