आरा: चार भाइयों ने बिना किसी के आर्थिक सहयोग के बना दिया बनास नदी पर पुल

आरा: चार भाइयों ने बिना किसी के आर्थिक सहयोग के बना दिया बनास नदी पर पुल
:रमडीहरा गांव निवासी चार भाई लल्लू यादव,कमता यादव,गुरु यादव,राम गोविंद यादव की हो रही तारीफ :पुल निर्माण से बराप पंचायत के दो गाँवो की दूरी हुई कम आरा(बोलता भोजपुर) दशरथ मांझी की कहानी हर किसी ने सुनी होगी जिसने पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया था।उसी तरह भोजपुर के चार भाइयों ने मिलकर नदी पर पुल ही बना डाला।कहा गया है कि अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो मंजिलें आसान हो जाती हैं।कुछ ऐसा ही जज्बा भोजपुर जिले के गड़हनी प्रखंड क्षेत्र में देखने को मिला।जहाँ एक गांव के चार भाइयों ने बिना किसी के आर्थिक सहायता के बनास नदी पुल बना दिया।पुल के बन जाने से ग्रामीण नदी के उस पार आसानी से आने जाने लगे। आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी प्रदेश के कई इलाकों में विकास की किरण नहीं पहुँच पाई है।एक तरफ बिहार सरकार विकास के बड़े बड़े दावा करती है तो दूसरी तरफ धरातल पर स्थिति कुछ और ही दिखाई देता है।हालाकि सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के उज्जवल भविष्य बनाने के लिए नई-नई योजनाएं बना रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को सभी प्रकार की सुविधाएं समय पर मिल सके, वहीं भोजपुर जिला मुख्यालय से महज 23 किलोमीटर दूर एक गांव ऐसा है, जहां नदी पर पुल न होने के चलते ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।नदी के दूसरे तरफ खेत होने की वजह से बरसात में नदी तैर कर पार करना पड़ता था।दशकों बीत जाने के बाद पुल निर्माण नहीं होने पर गांव के चार भाइयों ने मिलकर बनास नदी पर पुल ही बना डाला। रमडीहरा गांव के चार भाइयों ने बना डाला नदी पर पुल बराप पंचायत के रामडीहरा गांव निवासी चार भाई लल्लू यादव,कमता यादव,गुरु यादव,राम गोविंद यादव ने एकजुटना का परिचय देते हुए बनास नदी पर आपसी सहयोग से पुल ही बना डाला।जो चर्चा का विषय बना हुआ है।आस-पास गांव के लोग इस काम को देखकर दांत तले उंगली दबा रहे हैं।ग्रामीणों ने बताया कि चारो भाई का खेत रामडीहरा गांव से दक्षिण नदी पार सिहार गांव के तरफ है।जहां आने के लिए नदी तैर कर पार करना पड़ता था।दूसरे तरफ से खेत पर आने के लिए दस किलोमीटर का दूरी तय करना पड़ता था। जो " जेतना के हर ना ओतना के हरवाह " वाली बात हो जाती थी।जिसके बाद लल्लू यादव का पुत्र चन्दन यादव जो राज मिस्त्री का काम करता है,खुद से नदी पर पुल बना डाला। सात पिलर पर टिका हुआ है बनास नदी का पुल रमडीहरा गांव के पास चार भाइयों द्वारा बनाये गए नदी पर पुल का स्ट्रक्चर काफी मजबूत हैं।लोगो ने बताया कि सातों पिलर तकरीबन एक एक फिट मोटा है।जिसका ऊपरी भाग तीन फीट का चौड़ा है।जिसकी ढलाई करानी अभी बाकी है।फिलहाल सातों पिलर के सहारे बांस का चाचर बना दिया गया है।जिसके सहारे नदी को आसानी से पार किया जा सकता है।पुल निर्माण कार्य गर्मी के दिनों में शुरू हुआ था।पैसे के अभाव में पुल की ढलाई नहीं हो पाई है।अगले वर्ष पुल की ढलाई की जाएगी। पुल निर्माण से एक ही पंचायत के दो गांवों की दूरी हुई कम भोजपुर जिले के बराप पंचायत के सभी राजस्व गांव बनास नदी तट क्षेत्र पर स्थित है।कुछ गांव बनास नदी के पूरब व कुछ पश्चिम स्थित है।पुल निर्माण नहीं होने से बराप पंचायत के सिहार-बरघारा के लोगों को पंचायत के जनप्रतिनिधियों से मिलने के लिए आठ से दस किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ता था जो अब घटकर तीन से चार किलोमीटर हो गया है। प्रभावित होकर तीन घरवा टोला के लोग पुल बनाने का उठाया जिम्मा गड़हनी वार्ड एक मे स्थित तीन घरवा टोला के लोगों ने बनास नदी पर पुल बनाने का मन बन लिया है।रामडीहरा गांव में बने पुल को देख लोग प्रभावित हो गए है।पुल के अभाव में बरसात के दिनों में तीन घरवा टोला के लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हो जाते है।स्थानीय निवासी अविनाश उर्फ मन्ना ,राज शेखर,बीर बहादुर, राजदयाल सिंह, राधेश्याम सिंह,बब्लू,बिरेन्द्र सिंह ,जय बहादुर ने बताया कि सरकार के भरोशे रहने पर पुल निर्माण सम्भव नहीं है।अगले वर्ष तीन घरवा टोला के पास बनास नदी पर आपसी सहयोग से पुल निर्माण कराया जाएगा। सरकार व जनप्रतिनिधियों को दिखाया आईना रामडीहरा गांव के चार भाइयों द्वारा बिना किसी सरकारी सहयोग से नदी पर पुल निर्माण कर सरकार जनप्रतिनिधियों को आईना दिखाया है।जहां एक तरफ सरकार विकास की बात करती है, वहीं अभी भी कई ऐसे गांव हैं, जो विकास से दूर हैं। यहां के लोग लगातार विकास की मांग करते हैं, लेकिन न सरकार और न ही प्रशासन उनकी बात सुनता है।इससे गांवों तक विकास नहीं पहुंच पा रहा है।   अविनाश कुमार राव की खास रिपोर्ट