ज्वालामालिनी देवी माँ का आराधना करने से मिलता है मनोवांछित फल : अनुष्ठानाचार्य कपिल भैया

ज्वालामालिनी देवी माँ का आराधना करने से मिलता है मनोवांछित फल : अनुष्ठानाचार्य कपिल भैया
 आरा (भोजपुर)। जेल रोड स्थित दिगम्बर जैन चन्द्रप्रभु मन्दिर में चल रहे नव-दिवसीय नवरात्र उत्सव के चतुर्थ दिवस रविवार को अनुष्ठानाचार्य कपिल भैया सार्थक के मंगल निर्देशन में प्रातः समय भक्तों के द्वारा अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा हुआ। जिसमें शांतिधारा करने का सौभाग्य हुकुम चन्द्र जैन एवं अरिहंत-सिद्ध विजय जैन को प्राप्त हुआ। दोपहर समय ज्वालामालिनी देवी का दिव्य आह्वान श्रृंगारकर्ता मंजुला-आदेश जैन के परिवार द्वारा किया गया।

मण्डप पर रत्न से अर्चना भारती-रजत जैन, पुष्प से अर्चना उषा-धीरेंद्र चंद्र जैन एवं छत्र स्थापना मंजुला-सुनील कुमार जैन द्वारा किया। माँ के दिव्य आह्वान के पश्चात माता का भव्य श्रृंगार एवं गोद भराई हुई। अनुष्ठानाचार्य ने उपस्थित जनसमूह के बीच अपने प्रवचन में बताया कि देवी ज्वालामालिनी माँ की प्रतिमा अत्यंत चमत्कारी, अद्भुत एवं अलौकिक है, उन्होंने कहा कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा एवं निष्ठा से पूजन, आराधना एवं माँ की गोद भराई करता है, उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। संध्याकालीन कार्यक्रम में संगीत-कमलेश जैन के परिवार के द्वारा महाआरती एवं पालना मंजुला-आदेश जैन के परिवार के द्वारा किया गया।

मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि इस भव्य आयोजन को विश्वप्रसिद्ध जैनाचार्य चर्याशिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज एवं आर्यिका रत्न श्री 105 विमलप्रभा माता जी का मंगल आशीर्वाद प्राप्त है। कार्यक्रम में संयोजक डॉ शशांक जैन, आकाश जैन, श्रेष्ठ बिजय जैन, आर्ष जैन, सिद्धांत जैन, रोहित जैन, अपूर्व जैन, जिनवाणी जैन, अखिलेश कुमार जैन, पुष्पराज जैन, बिभू जैन, वार्ड पार्षद रेखा जैन के साथ समाज के युवक-युवतियों की सक्रिय भूमिका रही।