मानसिक रोगियों के प्रति सकारात्मक सोच की शपथ के साथ विश्व मानसिक दिवस पर आरजेएस राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न आजादी की अमृत गाथा में

मानसिक रोगियों के प्रति सकारात्मक सोच की शपथ के साथ विश्व मानसिक दिवस पर आरजेएस राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न  आजादी की अमृत गाथा में

आजादी की अमृत गाथा में मुंशी प्रेमचंद,जय प्रकाश नारायण,डा.सैफुद्दीन किचलू,  श्रीपाद अमृत डांगे, नानाजी देशमुख को आरजेएस फैमिली ने दी श्रद्धांजलि

आरा।  विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर की थीम  "असमान दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य" विषय पर ‌आरजेएस-टीजेएपीएस केबीएस के संयुक्त तत्वावधान में  विश्व भारती योग संस्थान , दिल्ली के सहयोग से आज़ादी की अमृत गाथा के 15 वें राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।
राम जानकी संस्थान के राष्ट्रीय संयोजक उदय मन्ना और तपसील जाति आदिवासी प्रकटन्न सैनिक कृषि विकास शिल्पा केंद्र के सचिव सोमेन कोले ने कहा की आजादी की अमृत गाथा के श्रृंखलाबद्ध 75 कार्यक्रमों की कड़ी के 15 वें अंक में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा.निमेश देसाई और डा. जुगल किशोर, योगगुरु आचार्य प्रेम भाटिया, सामाजिक संगठनों से जुड़े रवि कालरा और प्रो.बिजाॅन‌ मिश्रा सहित देशभर से लोग जुड़े। तकनीकी सहयोग आरजेएस टेक्निकल टीम का रहा।धन्यवाद ज्ञापन आरजेएस ऑब्जर्वर दीप माथुर और संचालन अभीप्सा विशेष विद्यालय की सचिव सुमन कुमारी ने किया,जो आरजेएस सकारात्मक भारत सूचना-केंद्र पटना बिहार से जुड़ी हैं।आरजेएस के पाॅजिटिव स्पीकर्स सेवा निवृत्त शिक्षिका प्रेम प्रभा झा, शिक्षिका वनिता सरोहा और मीडिया कर्मी स्मिता श्रीवास्तव ने वेबिनार में उपन्यास सम्राट
 मुंशी प्रेमचंद, लोकनायक जय प्रकाश नारायण, स्वतंत्रता सेनानी डा.सैफुद्दीन किचलू, नानाजी देशमुख और श्रीपाद अमृत डांगे के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला और समस्त आरजेएस फैमिली ने श्रद्धांजलि दी।
अतिथियों का स्वागत करते हुए  हैल्दी यू फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.बिजाॅन मिश्रा ने कहा कि मानसिक रोगियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।34% आत्महत्या सिर्फ भारत में होती है और इसका प्रमुख कारण मानसिक रोग है। हर एक रोगी को आयुष्मान भारत और हैल्थ पाॅलिसी  में संपूर्ण सुविधाएं अनिवार्य होनी चाहिए । आईआरडीए ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए हेल्थ इंश्योरेंस में अनिवार्य बजट किया है ,लेकिन पूरा खर्च अभी भी नहीं मिलता है। प्रो.बिजाॅन मिश्रा की प्रेरणा से सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने मानसिक रोगियों के प्रति सकारात्मक सोच की शपथ ली।
द अर्थ सेवियर्स फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष कर्मयोगी रवि कालरा  ने कहा कि  मानसिक रोगी सिर्फ सड़कों पर ही नहीं मिलते हैं बल्कि कभी-कभी परिवारों में भी समस्या खड़ी कर देते हैं। इसलिए मानसिक असंतुलित व्यक्ति को काउंसलिंग की बेहद जरूरत होती है । उन्होंने प्रदूषित खानपान से शरीर में फैलते जहर से बचने के लिए भी आगाह किया। क्योंकि यह प्रदूषण भी हमें मानसिक रोगी बना रहा है।द अर्थ सेवियर्स फाउंडेशन के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 2008 में बनाई संस्था में आज 800 के आसपास मानसिक रोगियों के लिए नि:शुल्क सुविधाएं दी जा रही हैं और अब गुरुग्राम में मानव कल्याण सेवा में समर्पित होकर दो हजार से ज्यादा बेघर मानसिक रोगियों के लिए द्वार खुलनेवाले हैं। यहां 24 घंटे रहना- खाना, काउंसलिंग और चिकित्सा आदि की नि:शुल्क  है। .यही नहीं हम लोग पुनर्वास की भी पूरी कोशिश करते हैं।मुख्य अतिथि दिल्ली स्थित इहबास के निदेशक और मनोचिकित्सक प्रो.(डा.) निमेश देसाई ने बताया कि कोरोना के समय और आज भी मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा होना सकारात्मक दिशा में एक अच्छा कदम है ,ये रूकना नहीं चाहिए।10 अक्टूबर मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा के साथ-साथ बेघरों को सशक्त करने का भी दिवस है।  बेघर मानसिक रोगी के लिए रवि कालरा के समाज सेवा की उन्होंने तारीफ की । उन्होंने  कहा कि इहबास द्वारा दिल्ली में कार्य दिवस पर बेघर मानसिक रोगियों को इलाज के लिए व्यवस्था की गई है। मोबाइल मेंटल नेटवर्क स्कीम इस साल से शुरू होने जा रही है।


मुख्य वक्ता सफदरजंग अस्पताल में निदेशक और कम्युनिटी मेडिसिन के प्रमुख प्रो.(डॉ) जुगल किशोर  ने कहा कि इलाज से बेहतर बचाव है।उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक अस्वस्थता के कारण व्यक्ति की  क्वालिटी ऑफ लाइफ ही प्रभावित  नहीं होती, बल्कि पूरा परिवार प्रभावित होता  है। सबसे ज्यादा समस्या 10 से 19 वर्ष के बच्चों में होती है ।दुनिया भर में इस रोग के इलाज पर होने वाले खर्च को बचाया जा सकता है अगर समाज में सकारात्मक सोच पैदा हो। उन्होंने कहा कि सांप के डंसने से लोग कम मरते हैं ,डर से ज्यादा मौतें होती हैं । इसे कोरोना काल में समझने की जरूरत है और कम्युनिटी मेडिसिन इसका एकमात्र हल है।


वेबिनार के सह-आयोजक विश्व भारती योग संस्थान के संस्थापक निदेशक योगी कवि आचार्य प्रेम भाटिया ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि अपनी जिंदगी को सिर्फ जीना जरूरी नहीं, समझने से अच्छी तरह चला सकते हैं ।ऐसा कहते हुए इस शेर में उन्होंने सब कुछ बयां कर दिया- " तन को भी कुछ वक्त देना चाहिए, मन को तो हर वक्त देना चाहिए"अपना दिल अपने पास रखने को उन्होंने कुछ यूं बयां किया-- "यह दिल कब उदास होता है ,जब किसी के पास होता है"। उनका कहना था कि हमारे आसपास फिजिकल ,मेंटल और सोशल हेल्थ ठीक रहने पर ही मानसिक रोगियों की संख्या घट सकती है। तन मन को ठीक रखने के लिए योग-प्रणायाम-ध्यान-साधना और , खेलकूद- व्यायाम को आवश्यक है।मानसिक स्वास्थ्य के लिए मल-मूत्र की अच्छी तरह सफाई की उन्होंने जरूरत बताई।वेबिनार के अंत में आरजेएस राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने नवरात्र, दुर्गा पूजा और विजयादशमी के उपलक्ष्य में मंगलवार 12 अक्टूबर को आरजेएस सकारात्मक भारत सूचना केंद्र जमशेदपुर झारखंड के सहयोग से आजादी की अमृत गाथा के सतरवें राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित करने की घोषणा की।अमृत गाथा का सोलहवां अंक देशभर से आ रही विडियो को यूट्यूब पर अपलोड करके किया जा रहा है। आगामी आरजेएस राष्ट्रीय वेबिनार 17 अक्टूबर और 31 अक्टूबर को आयोजित है।