सुबह सुबह गुलाबी ठंड की आहट शुरू, शिशुओं का ख्याल रखना बेहद जरूरी

सुबह सुबह गुलाबी ठंड की आहट शुरू, शिशुओं का ख्याल रखना बेहद जरूरी

• मौसम में बदलाव के समय नवजात बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत
• सामान्य लोगों की अपेक्षा नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है कमजोर

आरा | शारदीय नवरात्रि के समय से ही मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। इस दौरान सुबह व शाम में गुलाबी (हल्की-हल्की) ठंड लगना शुरू हो जाता है। पिछले दो तीन दिनों से सुबह का तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा है। जो आने वाले कुछ दिनों में तेजी से नीचे जाएगा। वहीं, अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री तक दर्ज किया जा रहा है। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में अधिक अंतर के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। जिसकी चपेट में आने के बाद सर्दी, जुखाम, बुखार, आदि की परेशानी बढ़ने लगती है। ऐसे में नवजातों, शिशुओं व बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत है। ताकि, उन्हें मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सके।

सभी को विशेष सजग रहने की जरूरत :
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, जिले में सुबह के समय ठंड और दोपहर के समय गर्मी लग रही है। जिससे लोगों को खासकर बच्चों व बुजुर्गों को बचना होगा। सुबह और शाम में ठंड महसूस हो रही है। इसलिए, ठंड से बचाव को लेकर हर किसी को विशेष सजग रहने की जरूरत है। ऐसे में खासकर नवजात बच्चों का उचित देखभाल करने की बेहद जरूरी है। बच्चे बदलते मौसम की के चपेट में तुरंत आ जाते हैं और तरह-तरह की के बीमारी से घिर जाते हैं। किन्तु, नवजात के स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सजग होकर नवजात को इन तमाम परेशानियों से दूर रखा जा सकता है।

शिशुओं को छः माह तक पिलाएं मां का दूध :
डॉ. केएन सिंह ने बताया, नवजात के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है। इससे न सिर्फ शारीरिक और मानसिक विकास ही होता है। बल्कि, नवजात की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी पूर्व की अपेक्षा काफी मजबूत होती है। जिससे नवजात कई रोगों से लड़ने में सक्षम और रहता है और खासकर संक्रामक बीमारी से भी दूर रहता है। इसलिए, नवजात को जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ मां का दूध ही पिलाएं।

बच्चों व शिशुओं को गर्म कपड़े पहनाएं :
बदलते मौसम से बच्चों को बचाने को लिए उपयुक्त गर्म और ऊनी कपड़े पहनाएं। इससे नवजात के शरीर का तापमान सामान्य रहेगा और ठंड से होने वाली परेशानी से दूर रहेगा। इसके अलावा वे साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और नवजात का उचित देखभाल करते रहें। क्योंकि, साफ-सफाई का ख्याल रखने से नवजात हर तरह की संक्रामक बीमारी से भी दूर रहेगा।

साफ बिस्तर पर नवजात को सुलाएं :
साफ-सफाई का ख्याल रखने के लिए इस बात का ध्यान रखें कि जिस बिछावन पर नवजात को सुलाएं, वह पूरी तरह साफ हो। गंदा होने के साथ ही तुरंत बिछावन को बदल दें। गीला कपड़ा पर नवजात को नहीं सुलाएं। वहीं, ठंड से होने वाली परेशानियों से दूर रखने के लिए सर्द हवाओं से बिलकुल दूर रखें और प्रतिदिन धूप लगाएं। इससे नवजात के शरीर को उचित गर्माहट मिलेगी और वह ठंड से संबंधित परेशानी से दूर रहेगा।