समय पर यदि हो जाती फाइलेरिया की पहचान, तो आज नहीं होती पैरों में परेशानी : तारा मुनि

समय पर यदि हो जाती फाइलेरिया की पहचान, तो आज नहीं होती पैरों में परेशानी : तारा मुनि

- फाइलेरिया से पीड़ित पाण्डेयपट्टी की तारा मुनि देवी लोगों से एमडीए की दवाएं खाने की कर रही अपील

बक्सर | वैसे तो बीमारियों का काम ही है लोगों को कमजोर और लाचार करना है। लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं, जो न लोगों को कमजोर करती हैं, बल्कि उन्हें दिव्यांग भी बना देती हैं। जिनमें फाइलेरिया भी शामिल है। फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है, जो बड़े पैमाने पर लोगों को दिव्यांग बना रही है। यह जान तो नहीं लेती है, लेकिन जिंदा आदमी को मृत समान बना देती है। मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसी ही कहानी जिले के सदर प्रखंड स्थित पांडेय पट्टी की रहने वाली 65 वर्षीय तारा मुनि देवी की है। जो इस बीमारी की ग्रेड तीन की मरीज हैं और पैर में सूजन से ग्रसित हैं। यदि समय पर इनकी बीमारी नहीं पकड़ में आती, तो यह हाथी पांव का रूप ले सकती थी। पिछले दो साल से इनका इलाज चल रहा है। जिससे थोड़ी राहत मिली है.

जानकारी के अभाव में बढ़ता गया फाइलेरिया :
तारा मुनि देवी का कहना है फाइलेरिया से वह बीते सात साल से ग्रसित हैं। शुरुआती दिनों में पैर में हल्का सूजन हुआ, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। सामान्य सूजन का सोच वह गर्म पानी से पैर को धोने लगी और फिर ठीक नहीं होने पर छोड़ दिया। फाइलेरिया धीरे धीरे बढ़ने लगा और उनकी पैरों की तकलीफ भी बढ़ने लगी। सूजन के कारण उन्हें चलने फिरने में परेशानी होने लगी। उन्होंने कहा, फाइलेरिया ने उनका जीवन बदल दिया है। बीमारी की पहचान के बाद वह मानसिक रूप से कमजोर रहने लगीं। लेकिन, इलाज के दरम्यान चिकित्सकों के द्वारा भरोसा दिलाने के बाद उनके मन की दुविधा दूर हुई।

लोगों से की अनिवार्य रूप से एमडीए की दवाओं को खाने की अपील :
फाइलेरिया से ग्रसित होने के बाद तारा मुनि देवी ने इस बीमारी की गंभीरता को जाना। जिसके बाद अब वह साल में एक बार अपने परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को एमडीए अभियान के दौरान दवाओं का सेवन कराती हैं। उन्होंने कहा, अब तो सरकार भी लोगों को फाइलेरिया की बीमारी से मुक्त करने के उद्देश्य से अभियान चला रही है। ताकि, कोई भी इस बीमारी से ग्रसित न हो पाए। इसलिए जिले के सभी लोग एमडीए की दोनों दवाओं डीईसी व अल्बेंडाजोल का सेवन बेहद जरूरी है।

ऐसे करें दवा का सही इस्तेमाल :
जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया, फाइलेरिया से बचाव के लिए डीईसी व एल्बेंडाजोल की खुराक 2 वर्ष से ऊपर उम्र के लोगों को लेना है।  एल्बेंडाजोल को चबाकर खाना है।  2 से 5 वर्ष के बच्चों को डीईसी की एक गोली, 5 से 14 वर्ष को 2 गोली व उससे ऊपर उम्र के लोगों को 3 गोली दी जा रही है।  साथ में सभी लक्षित वर्ग को एल्बेंडाजोल की एक दवा चबाकर खानी है। ये खुराक लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम या आंगनबाड़ी / आशा कार्यकरता के सामने ही खिलाई जा रही है। ये दवा लोगों को खाना खाने के बाद लेना है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिला व गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को इस दवा का सेवन नहीं करना है। 

फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
- रात को सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें। 
- अपने घर व आसपास में गंदगी या कूड़ा जमा ना होने दें।
- बीमारी या लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से मिलें।